हैदराबाद डेक्कन चार्जर्स (कप्तान - एडम गिलक्रिस्ट)
डेक्कन चार्जर्स को इस बार शायद वेस्टइंडीज के खिलाडि़यों से उम्मीद है तभी तो पिछले सीजन में सबसे निचले पायदान पर रही इस टीम ने इस बार दोनो वेस्टइंडीज खिलाडि़यों को शामिल किया है। तेज गेंदबाज फिडेल एडवर्डस और बल्लेबाज डेवन स्मिथ को शामिल किया है। स्मिथ पिछले सीजन में मुंबई इंडियंस में ड्रेवन ब्रॉवो के विकल्प के तौर पर खेले थे। इतने आक्रामक बल्लेबाजों के होते हुए भी यह टीम आईपीएल में सबसे निचले पायदान पर रही। (हालांकि इस बार शाहिद अफरीदी नहीं आएंगे) इस टीम के पास बल्लेबाज तो थे, लेकिन गेंदबाजी पक्ष कुछ कमजोर नजर आ रहा था। टीम इस बार कुछ बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद कर रही होगी।
दिल्ली डेयरडेविल्स (कप्तान - वीरेंद्र सहवाग)
ऑफ सीजन में ऑस्ट्रेलिया के बल्लेबाज डेविड वॉर्नर और तेज गेंदबाज ड्रिक नेंस और एड्रयू मैक्डोनाल्ड को शामिल करने वाली दिल्ली डेयरडेविल्स ने इस बार की नीलामी में दो इंग्लिश खिलाडि़यों को अपनी टीम में शामिल किया। ओवेस शाह और पॉल कालिंगवुड को अपनी टीम में शामिल करने के बाद किया। दोनो ही खिलाड़ी गेंद और बल्ले दोनो से ही अपना हुनर दिखाने में माहिर यह दोनो खिलाड़ी टीम के मध्यक्रम को मजबूती देते हैं। पिछली बार ब्रेट ग्रीव्स को इस बार नीलामी में कोई खरीददार नहीं मिला। पिछले बार सेमीफाइनल तक का सफर तय करने वाली यह टीम इस बार टूर्नामेंट में आगे तक का सफर तय करना चाहेगी।
मुंबई इंडियंस (कप्तान - सचिन तेंदुलकर)
आईपीएल की सबसे मंहगी इस टीम ने बल्लेबाज रॉबिन उथप्पा को बंगलौर रॉयल चैलेंजर्स के जहीर खान से बदला। इंडियंस ने अपने खेमे में दक्षिण अफ्रीका के स्टार बल्लेबाज जेपी डुमिनी को (करीब 4.5 करोड़ रूपए) की रकम अदा कर अपनी टीम का हिस्सा बनाया है। जबरदस्त फॉर्म में चल रहे ड्युमिनी अपनी टीम के लिए कारगर हथियार साबित हो सकते हैं।
किंग्स इलेवन पंजाब ( कप्तान - सचिन तेंदुलकर)
शॉन मॉर्श को पिछले साल आईपीएल के जरिए काफी पहचान मिली। ऑस्ट्रेलिया के इस बाएं हाथ के सलामी बल्लेबाज ने अपनी टीम को सेमीफाइनल में पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। लेकिन, इस बार मॉर्श कितने वक्त के लिए आईपीएल में खेल पाएंगे यह बात भी ध्यान देने वाली होगी। टीम ने इस बार इंग्लिश आलरांउडर रवि बोपारा और वेस्टइंडीज के तेज गेंदबाज जेर्मान टेलर को अपनी टीम में शामिल किया है। रामनरेश सरवन को इस बार किंग्स ने अपनी टीम में जगह नहीं दी। टीम में शॉन मॉर्श के अलावा साइमन कैटिच और जेम्स होप्स जैसे ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी हैं। इस टीम में एक भी दक्षिण अफ्रीकी खिलाड़ी नहीं है।
Thursday, April 16, 2009
आ देखें जरा किसमें कितना है दम आईपीएल सीजन २ पार्ट-1
मनोरंजन का बाप एक बार फिर धूम मचाने के लिए तैयार है। इस बार यह धूम भारत नहीं दक्षिण अफ्रीका में बजेगी। लगभग सभी टीमें दक्षिण अफ्रीका पहुंच चुकी हैं। आइए डालते हैं एक नजर सभी टीमों पर
राजस्थान रॉयल्स ( कप्तान- शेन वॉर्न)
पिछली बार की विजेता राजस्थान रॉयल्स इस बार फिर हल्ला बोलने के लिए तैयार है। टीम के पास बड़े खिलाड़ी भले ही न हो, लेकिन उनके पास है जोश, जज्बा और जनून। इसके साथ है कप्तान और कोच शेन वॉर्न की सधी हुई रणनीति। पिछली बार के स्टार ऑस्ट्रेलियाई आलराउंडर शेन वॉटसन और पाकिस्तानी गेंदबाज सोहेल तनवीर की गैर मौजूदगी में इस बार टीम के बाकी खिलाडि़यों पर ज्यादा जिम्मेदारी निभानी होगी। दक्षिण अफ्रीका की टी-20 चैपियंस कोबरा से मिली हार को भूल कर रॉयल्स आईपीएल पर अपना खिताब कायम रखने की जंग के लिए उतरेंगे।
चेन्नई सुपरकिंग्स (कप्तान- महेंद्र सिंह धौनी)
बस एक कदम! इतना ही फासला था चेन्नई सुपरकिंग्स और जीत के बीच। गत वर्ष की उपविजेता पिछले सीजन की उपविजेता चेन्नई सुपरकिंग्स इस बार आखिरी गेंद पर मैच नहीं हारना चाहेगी। टीम ने इस बार इंग्लैंड के स्टार आलराउंडर एंड्रयू फ्लिंटॉफ को अपनी टीम में शामिल किया है। गेंद और बल्ले दोनो से मैच जिताने की खूबी रखने वाले इंग्लिश आलराउंडर टीम को गजब का बैलेंस देते हैं। टीम का बैलेंस उसकी बड़ी ताकत है। सुरेश रैना, मैथ्यू हैडन, एस.बद्रीनाथ और एल्बी मॉर्केल जैसे बल्लेबाजों के साथ टीम के पास मुरलीधरन और मखाया नतिनी जैसे गेंदबाज भी हैं। इन सबसे आगे कप्तान महेंद्र सिंह धौनी तो हैं ही जो इस समय जीत के रथ पर सवार हैं। तो, बाकी टीमों हो जाओ होशियार चेन्नई के शेर दहाड़ने को हैं तैयार।
बंगलौर रॉयल चैलेंजर्स (कप्तान - केविन पीटरसन)
टी-20 में आ पहुंची है टेस्ट टीम। विजय माल्या की इस टीम को पिछली बार इसी तरह से पुकारा गया था। लेकिन, इस बार टीम खुद पर लगा यह दाग धोने को बेताब है। टीम ने इस बार अपने खेमे में शामिल किया है इंग्लैंड के पूर्व कप्तान केविन पीटरसन को। पीटरसन जो जाने जाते हैं अपनी धाकड़ बल्लेबाजी और स्विच हिटिंग के लिए। केपी को ही इस बार रॉयल चैलेंजर्स की कप्तानी दी गयी है। उनकी गैरमौजूदगी में दक्षिण अफ्रीका के आलराउंडर जैक कैलिस यह जिम्मेदारी संभालेंगे। इसके साथ ही न्यूजीलैंड के धाकड़ बाएं हत्था बल्लेबाज जेसी रायडर भी शामिल हुए हैं रॉयल चैलेंजर्स के खेमे में। मुंबई से जहीर खान और रॉबिन उथप्पा की अदला बदली की। मुंबई से गौरव धीमान को अपनी टीम में अपनी शामिल किया। राजस्थान रॉयल्स से गेंदबाज पंकज सिंह भी बंगलौर रॉयल चैलेंजर्स की इस सीजन की टीम का हिस्सा बने हैं। साथ ही उत्तर प्रदेश के आलराउंडर भुवनेश्वर कुमार को भी टीम में शामिल किया गया है।
कोलकाता नाइट राइडर्स (कप्तान - ब्रेंडन मेक्कुलम)
कोलकाता नाइट राइडर्स की कमान इस बार कोलकाता के हीरो सौरव गांगुली के हाथ में नहीं होगी। उनके स्थान पर न्यूजीलैंड के विकेटकीपर बल्लेबाज ब्रेंडन मेक्कुलम को यह जिम्मेदारी दी गयी है। केकेआर ने आईपीएल के दूसरे सीजन के लिए सिर्फ बांग्लादेश के मुशरफे मुर्तजा को ही खरीदा। 50हजार डॉलर बेस प्राइस वाले मुर्तजा को 6लाख डॉलर की रकम मिली। सौरव गांगुली, क्रिस गेल और डेविड हसी जैसे आक्रामक बल्लेबाज टीम के बल्लेबाजी पक्ष को मजबूती देते हैं।
राजस्थान रॉयल्स ( कप्तान- शेन वॉर्न)
पिछली बार की विजेता राजस्थान रॉयल्स इस बार फिर हल्ला बोलने के लिए तैयार है। टीम के पास बड़े खिलाड़ी भले ही न हो, लेकिन उनके पास है जोश, जज्बा और जनून। इसके साथ है कप्तान और कोच शेन वॉर्न की सधी हुई रणनीति। पिछली बार के स्टार ऑस्ट्रेलियाई आलराउंडर शेन वॉटसन और पाकिस्तानी गेंदबाज सोहेल तनवीर की गैर मौजूदगी में इस बार टीम के बाकी खिलाडि़यों पर ज्यादा जिम्मेदारी निभानी होगी। दक्षिण अफ्रीका की टी-20 चैपियंस कोबरा से मिली हार को भूल कर रॉयल्स आईपीएल पर अपना खिताब कायम रखने की जंग के लिए उतरेंगे।
चेन्नई सुपरकिंग्स (कप्तान- महेंद्र सिंह धौनी)
बस एक कदम! इतना ही फासला था चेन्नई सुपरकिंग्स और जीत के बीच। गत वर्ष की उपविजेता पिछले सीजन की उपविजेता चेन्नई सुपरकिंग्स इस बार आखिरी गेंद पर मैच नहीं हारना चाहेगी। टीम ने इस बार इंग्लैंड के स्टार आलराउंडर एंड्रयू फ्लिंटॉफ को अपनी टीम में शामिल किया है। गेंद और बल्ले दोनो से मैच जिताने की खूबी रखने वाले इंग्लिश आलराउंडर टीम को गजब का बैलेंस देते हैं। टीम का बैलेंस उसकी बड़ी ताकत है। सुरेश रैना, मैथ्यू हैडन, एस.बद्रीनाथ और एल्बी मॉर्केल जैसे बल्लेबाजों के साथ टीम के पास मुरलीधरन और मखाया नतिनी जैसे गेंदबाज भी हैं। इन सबसे आगे कप्तान महेंद्र सिंह धौनी तो हैं ही जो इस समय जीत के रथ पर सवार हैं। तो, बाकी टीमों हो जाओ होशियार चेन्नई के शेर दहाड़ने को हैं तैयार।
बंगलौर रॉयल चैलेंजर्स (कप्तान - केविन पीटरसन)
टी-20 में आ पहुंची है टेस्ट टीम। विजय माल्या की इस टीम को पिछली बार इसी तरह से पुकारा गया था। लेकिन, इस बार टीम खुद पर लगा यह दाग धोने को बेताब है। टीम ने इस बार अपने खेमे में शामिल किया है इंग्लैंड के पूर्व कप्तान केविन पीटरसन को। पीटरसन जो जाने जाते हैं अपनी धाकड़ बल्लेबाजी और स्विच हिटिंग के लिए। केपी को ही इस बार रॉयल चैलेंजर्स की कप्तानी दी गयी है। उनकी गैरमौजूदगी में दक्षिण अफ्रीका के आलराउंडर जैक कैलिस यह जिम्मेदारी संभालेंगे। इसके साथ ही न्यूजीलैंड के धाकड़ बाएं हत्था बल्लेबाज जेसी रायडर भी शामिल हुए हैं रॉयल चैलेंजर्स के खेमे में। मुंबई से जहीर खान और रॉबिन उथप्पा की अदला बदली की। मुंबई से गौरव धीमान को अपनी टीम में अपनी शामिल किया। राजस्थान रॉयल्स से गेंदबाज पंकज सिंह भी बंगलौर रॉयल चैलेंजर्स की इस सीजन की टीम का हिस्सा बने हैं। साथ ही उत्तर प्रदेश के आलराउंडर भुवनेश्वर कुमार को भी टीम में शामिल किया गया है।
कोलकाता नाइट राइडर्स (कप्तान - ब्रेंडन मेक्कुलम)
कोलकाता नाइट राइडर्स की कमान इस बार कोलकाता के हीरो सौरव गांगुली के हाथ में नहीं होगी। उनके स्थान पर न्यूजीलैंड के विकेटकीपर बल्लेबाज ब्रेंडन मेक्कुलम को यह जिम्मेदारी दी गयी है। केकेआर ने आईपीएल के दूसरे सीजन के लिए सिर्फ बांग्लादेश के मुशरफे मुर्तजा को ही खरीदा। 50हजार डॉलर बेस प्राइस वाले मुर्तजा को 6लाख डॉलर की रकम मिली। सौरव गांगुली, क्रिस गेल और डेविड हसी जैसे आक्रामक बल्लेबाज टीम के बल्लेबाजी पक्ष को मजबूती देते हैं।
Monday, April 6, 2009
विकेट के आगे ही नहीं पीछे भी 'द वॉल' हैं द्रविड़
भारत मल्होत्रा
वेलिंगटन का बेसिन रिजर्व मैदान। न्यूजीलैंड की दूसरी पारी के 11वें ओवर की आखिरी गेंद। जहीर खान का सामना कर रहे हैं टिम मेकिन्टोश। गेंद बाएं हाथ के मेकिन्टोश के बल्ले का बाहरी किनारा लेते हुए स्लिप में पहली स्लिप में खड़े सीधे राहुल द्रविड़ के हाथों में गयी। और द्रविड़ ने कैच को लपकने में कोई गलती नहीं की। लपकने के बाद द्रविड़ ने गेंद को चूमा। इसके बाद हरभजन सिंह की गेंद पर जैसी रायडर का कैच लपक कर अपने इस आंकड़े को 183 तक पहुंचाया।
23 जनवरी 1996 को लॉड्स में जवागल श्रीनाथ की गेंद पर इंग्लैंड के नासिर हुसैन से शुरू हुआ यह सफर अभी तक जारी है। द्रविड़ ने अपने करियर के 134 मैचों में पूर्व ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी मॉर्क वॉ के इस रिकॉर्ड को तोड़ा जिन्होंने अपने करियर में 181 कैच लपके थे।
पूर्व भारतीय विकेटकीपर विजय दाहिया ने द्रविड़ के इस रिकॉर्ड को एक बड़ी उपलब्धि बताया। दाहिया की राय में स्लिप में फील्डिंग करना कोई मजाक नहीं है। इसके लिए सबसे जरूरी चीज- एकाग्रता है। आपको हर गेंद पर इस तरह तैयार रहना है, जैसे कि वो गेंद आपके पास आ रही हो। दाहिया कहते हैं कि सॉफ्ट हैंड भी स्लिप में फील्डिंग करने का दूसरा सबसे अहम मंत्र है। इसके अलावा चपलता होनी भी जरूरी है, तो फिर युवराज सिंह स्लिप में क्यों कामयाब नहीं हो पाए, इस पर दाहिया ने कहा युवराज एक बेहतरीन फील्डिंग है, लेकिन स्लिप फील्डिंग स्पेशेलिस्ट पोजीशन है।
हरभजन सिंह की गेंद पर जैसी रॉयडर का कैच लपकते ही द्रविड़ के नाम एक और दिलचस्प उपलब्धि जुड़ गई। दरअसल, इससे पहले द्रविड़ ने हरभजन और अनिल कुंबले की गेंदों पर मिलाकर 99 कैच लपके थे और जैसी रायडर इस भारतीय स्पिन जोड़ी (हालांकि कुंबले अब टीम के साथ नहीं हैं) के साथ उनका शतक पूरा करवाया।
द्रविड़ को नैचुरल कैचर मानने से इंकार करने वाले मॉर्क वॉ भी इस बात से इत्तेफाक रखते हैं कि स्पिनर्स के खिलाफ स्लिप फील्डिंग करना काफी मुश्किल होता है। वॉ भी द्रविड़ के स्पिन गेंदबाजों के खिलाफ प्रदर्शन को एक बड़ी कामयाबी मानते हैं क्योंकि इस दौरान कैच लपकने का वक्त काफी कम होता है। द्रविड़ का यह प्रदर्शन दिखाता है वे स्पिन और तेज दोनो ही तरह के गेंदबाजी पर बेहतरीन स्लिप फील्डर हैं।
लेकिन, क्या द्रविड़ के कैचों को सिर्फ नम्बर ही मान लेना चाहिए। दरअसल, यह द्रविड़ के उन 183 टेस्ट विकेटों में योगदान है। यह द्रविड़ की उसी एकाग्रता का नतीजा है जिसकी बदौलत वे टेस्ट क्रिकेट में 10हजार से ज्यादा बना चुके हैं। और, उनकी वही एकाग्रता उनकी फील्डिंग में भी नजर आती है। ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका के खिलाफ पिछले साल खेली गई टेस्ट सीरीज के दौरान न तो उनका बल्ला चल रहा था और न ही वे गेंद को सही तरीके से लपकने में ही कामयाब हो पा रहे थे। अब उनका आत्मविश्वास लौटता नजर आ रहा है, और द्रविड़ दोनो में ही अच्छा खेल दिखा रहे हैं। लेकिन, इस सीरीज में अपने चार अर्द्धशतकों में से किसी भी पारी को शतक में न बदल पाने का मलाल उन्हें भी है।
Friday, April 3, 2009
गेंद और बल्ले की खूबसूरत जंग रहा वेलिंगटन टेस्ट का पहला दिन
आज के दौर में जहां क्रिकेट में गेंद और बल्ले के बीच जंग में गेंद लगातार पिछडती चली जा रही है, टेस्ट क्रिकेट में आज भी गेंद और बल्ले के बीच खूबसूरत मुकाबले देखने को मिल जाते हैं। वेलिंगटन के रिजर्व बेसिन मैदान पर भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेले जा रहे तीसरे टेस्ट के पहले दिन कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। एक ओर जहां बल्लेबाज रन बटोरने में कामयाब रहे, वहीं गेंदबाजों ने भी 9 विकेट लेकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
भारत मल्होत्रा
वेलिंगटन टेस्ट का पहला दिन टेस्ट क्रिकेट की खूबसूरती लिए हुए था। इसमें रन थे, विकेट थे, द्रविड़ की पारी में जहां टेस्ट क्रिकेट का संयम था वहीं हरभजन और जहीर खान ने वनडे और टी-20 का अंदाज दिखाया। इससे बेहतर, किसी और चीज की भला उम्मीद ही क्या की जा सकती है। मैच के पहले दिन, जहां भारत ने 375 रन बनाए जो उसके टेस्ट मैचों के पहले दिन बनाए गए सबसे ज्यादा रन हैं, वहीं न्यूजीलैंड भी 9 विकेट हासिल करने में कामयाब रहा।
भारत के लिए वीरेंद्र सहवाग और गौतम गंभीर ने तेज शुरूआत की। महज 10वें ओवर में टीम इंडिया 50 का आंकड़ा छू चुकी थी। सहवाग अपने चिर-परिचित अंदाज में बल्लेनबाजी कर रहे थे। 16वें ओवर की तीसरी गेंद पर जब सहवाग 48 रन बनाकर आउट हुए, तब तक भारत 73 रन बना चुका था। इसके अगले ही ओवर में गौतम गंभीर भी आउट हो गए।
क्रीज पर दो नए बल्लेबाज राहुल द्रविड़ और सचिन तेंदुलकर आ गए। न्यूएजीलैंड को मैच में वापसी की राह नजर आने लगी। लेकिन, इन दोनो अनुभवी बल्लेएबाजों ने कीवी टीम के इरादों पर पानी फेर दिया। इसके बाद फिर एडवांटेज इंडिया। लेकिन, इसके बाद कहानी में मोड़ आने शुरु होते हैं अब इसे क्रिकेट की खूबसूरती कहिए या फिर कुछ और। 165 के स्कोर पर सचिन 62 रन बनाकर पैवेलियन लौटते हैं और 204 तक पहुंचते पहुंचते टीम इंडिया 6 विकेट खोकर गंभीर संकट में आ चुकी होती है।
टीम इंडिया की पारी को पार लगाने की बागडोर होती है कप्तान महेंद्र सिंह धौनी और हरभजन सिंह के हाथों में। दोनों के बीच सातवें विकेट के लिए 79 रनों की साझेदारी ने टीम इंडिया को संकट से निकालने का काम किया। जब धौनी और हरभजन बल्लेबाजी करने लगे तो उम्मीद तो यही की जा रही थी कि टीम इंडिया किसी तरह 275से 300 के बीच का आंकड़ा छू लेगी। लेकिन, एक बार फिर कहानी में ट्विस्ट आता है। धौनी और हरभजन दबाव में आने की बजाए उल्टे कीवी टीम पर धावा बोल देते हैं, खासकर हरभजन। दिन के हीरो रहे हरभजन महज 58 गेंदों में छह चौकों और एक छक्के की मदद से अपना सातवां अर्द्धशतक पूरा करते हैं। धौनी आउट होते हैं तो टीम इंडिया का स्कोर होता है- 283/7। हरभजन सिंह को 60 रन बनाकर आउट होने के बाद भी इस बात का मलाल रह जाता है कि वे अपनी इस पारी को शतक में तब्दील नहीं कर पाए।
इसके बाद निचले क्रम के बल्लेकबाजों ने अपने हाथ दिखाने शुरु किए। वे लगातार स्लॉग करते रहे और किवी गेंदबाजों की सारी कोशिशें बेकार जाती रही। टीम इंडिया ने पहले दिन 214 रन चौकों और छक्कों की मदद से बनाए। अब अगर इस आंकड़े को नेपियर टेस्ट के आखिरी दिन के सामने रखा जाए जिसमें भारत ने पूरे दिन महज 205 रन बनाए थे। दिन के आखिरी सेशन के 35 ओवर में टीम इंडिया ने 185 रन जोड़े।
इस बीच कुछ हल्के -फुल्के लम्हें भी आए। न्यूदजीलैंड के गेंदबाज मुनफ पटेल को आउट करने की कोशिश में लगे थे और मुनफ गेंद को स्लॉग करने में। ऐसी ही एक गेंद बल्ले का बाहरी किनारा लेती हुई थर्ड मैन के ऊपर से चार रनों के लिए गयी। जहीर जिस गेंद पर आउट हुए, ओ’ब्रॉयन की उस गेंद को वे विकेटकीपर ब्रेंडन मॅक्कु्लम के सिर के ऊपर से मारना चाहते थे, लेकिन कामयाब नहीं हुए। वहीं एक बार मुनफ और ईशांत शर्मा रन लेते समय टकरा गए। कमाल की बात यह रही कि ओ’ब्रॉयन भी गेंद उठाते समय फिसल गए।
तो, क्रिकेट की खूबसूरती लिए इस दिन में दोनो ही टीमें अपने अपने लम्हों को लेकर खुश होंगे। हां बावजूद इसके न्यूजीलैंड को भारतीय पुछल्ले बल्लेबाजों द्वारा बनाए रन जरूर सता रहे होंगे।
Thursday, March 26, 2009
न्यूजीलैंड के नाम रहा नेपियर का पहला दिन
न्यूजीलैंड के नेपियर शहर का मैक्लिन पॉर्क स्टेडियम। इस मैदान को लेकर मेजबान टीम के पास कोई और मीठी याद नहीं थी। इस मैदान पर खेले गए सात मुकाबलों में मेजबान टीम अभी तक एक बार भी जीत का स्वाद नहीं चख पाई थी। और, जब मार्टिन गुप्टिल 8 रन बनाकर जहीर खान की गेंद पर 8 रन बनाकर आउट हुए न्यूजीलैंड 23 रन पर 3 विकेट खोकर संकट में आ गयी थी। हालांकि मैक्लनटोश अंपायर के गलत फैसले का िशकार हुए।
लेकिन, यहीं से किस्मत ने कीवी टीम के साथ देना शुरु कर दिया। रॉस टेलर की पारी की शुरुआत अच्छी नहीं रही। गेंद उनके बल्ले को छकाती रही। गेंद कभी बल्ले का बाहरी किनारा लेती स्लिप के ऊपर से जाती और कभी स्लिप के बीच में से। लेकिन, इस सब बातों के बीच टेलर लगे रहे और शतक बनाकर ही दम लिया। इस बीच उन्हें दो जीवनदान भी मिले, लेकिन टेलर का सफर जारी रहा। रॉयडर के साथ मिलकर उन्होंने रिकॉर्ड 271 रन जोड़े।
रॉयडर और टेलर ने मिलकर न्यूजीलैंड को न सिर्फ संकट से निकालने का काम किया बल्कि दिन का खेल खत्म होने तक 4 विकेट पर 351 रन बनाकर मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया है। टेलर 26 चौकों और एक छक्के की मदद से 151 रन बनाकर हरभजन सिंह की गेंद पर आउट हुए, लेकिन रॉयडर अभी भी 137 रन बनाकर जमे हुए हैं।
विकेट पर घास नजर नहीं आ रही। ऐसे में गेंदबाजों के लिए मददगार के तौर पर कही जाने वाली यह विकेट अब बल्लेबाजों का स्वर्ग नजर आ रही है। तभी तो टॉस जीतते ही डेनियल विटोरी ने पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। हालांकि, उनके शुरुआती बल्लेबाजों ने उनके इस फैसले को गलत ठहराने में कोई कसर नहीं छोड़ी। लेकिन, रॉयडर और टेलर की परियों के बाद विटोरी कुछ राहत की सांस ले रहे होंगे।
इस मैच में भारत की ओर से महेंद्र सिंह धोनी नहीं खेल रहे हैं। ऐसे में टीम की कमान वीरेंद्र सहवाग ने संभाली। उन्होंने सभी तिकड़म आजमा लिए लेकिन टेलर ओर रॉयडर की जोड़ी से पार नहीं पा सके। कभी खुद को गेंदबाजी पर लाए तो कभी युवराज को, लेकिन टेलर और रॉयडर तो जैसे इरादा कर चुके थे कि अब हार नहीं मानेंगे। टेलर ने अपने करियर का तीसरा और रॉयडर ने सीरीज में अपना दूसरा शतक पूरा किया।
भारतीय टीम की खराब फील्डिंग ने भी उसे निराश किया। युवराज सिंह और राहुल द्रविड़ ने अगर टेलर का कैच पकड़ने में मुस्तैदी दिखाई होती तो दिन के आखिर में तस्वीर कुछ और ही बयां कर रही होती। मैदान पर खिलाडि़यों के अंदर जोश और जज्बे का अभाव भी देखा जा सकता था। जैसे वे कुछ करने की बजाए, खुद ब खुद कुछ होने का इंतजार कर रहे हों। अब यह धौनी की गैरमौजूदगी का असर था या फिर रॉयडर और टेलर ने टीम इंडिया के हौसले पस्त कर दिये थे।
कुल मिलाकर टीम इंडिया के लिए आज का दिन भुलाने वाला ही रहा। कल टीम को नए हौसले और जज्बे के साथ मैदान पर उतरना होगा।
भारत मल्होत्रा
लेकिन, यहीं से किस्मत ने कीवी टीम के साथ देना शुरु कर दिया। रॉस टेलर की पारी की शुरुआत अच्छी नहीं रही। गेंद उनके बल्ले को छकाती रही। गेंद कभी बल्ले का बाहरी किनारा लेती स्लिप के ऊपर से जाती और कभी स्लिप के बीच में से। लेकिन, इस सब बातों के बीच टेलर लगे रहे और शतक बनाकर ही दम लिया। इस बीच उन्हें दो जीवनदान भी मिले, लेकिन टेलर का सफर जारी रहा। रॉयडर के साथ मिलकर उन्होंने रिकॉर्ड 271 रन जोड़े।
रॉयडर और टेलर ने मिलकर न्यूजीलैंड को न सिर्फ संकट से निकालने का काम किया बल्कि दिन का खेल खत्म होने तक 4 विकेट पर 351 रन बनाकर मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया है। टेलर 26 चौकों और एक छक्के की मदद से 151 रन बनाकर हरभजन सिंह की गेंद पर आउट हुए, लेकिन रॉयडर अभी भी 137 रन बनाकर जमे हुए हैं।
विकेट पर घास नजर नहीं आ रही। ऐसे में गेंदबाजों के लिए मददगार के तौर पर कही जाने वाली यह विकेट अब बल्लेबाजों का स्वर्ग नजर आ रही है। तभी तो टॉस जीतते ही डेनियल विटोरी ने पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। हालांकि, उनके शुरुआती बल्लेबाजों ने उनके इस फैसले को गलत ठहराने में कोई कसर नहीं छोड़ी। लेकिन, रॉयडर और टेलर की परियों के बाद विटोरी कुछ राहत की सांस ले रहे होंगे।
इस मैच में भारत की ओर से महेंद्र सिंह धोनी नहीं खेल रहे हैं। ऐसे में टीम की कमान वीरेंद्र सहवाग ने संभाली। उन्होंने सभी तिकड़म आजमा लिए लेकिन टेलर ओर रॉयडर की जोड़ी से पार नहीं पा सके। कभी खुद को गेंदबाजी पर लाए तो कभी युवराज को, लेकिन टेलर और रॉयडर तो जैसे इरादा कर चुके थे कि अब हार नहीं मानेंगे। टेलर ने अपने करियर का तीसरा और रॉयडर ने सीरीज में अपना दूसरा शतक पूरा किया।
भारतीय टीम की खराब फील्डिंग ने भी उसे निराश किया। युवराज सिंह और राहुल द्रविड़ ने अगर टेलर का कैच पकड़ने में मुस्तैदी दिखाई होती तो दिन के आखिर में तस्वीर कुछ और ही बयां कर रही होती। मैदान पर खिलाडि़यों के अंदर जोश और जज्बे का अभाव भी देखा जा सकता था। जैसे वे कुछ करने की बजाए, खुद ब खुद कुछ होने का इंतजार कर रहे हों। अब यह धौनी की गैरमौजूदगी का असर था या फिर रॉयडर और टेलर ने टीम इंडिया के हौसले पस्त कर दिये थे।
कुल मिलाकर टीम इंडिया के लिए आज का दिन भुलाने वाला ही रहा। कल टीम को नए हौसले और जज्बे के साथ मैदान पर उतरना होगा।
भारत मल्होत्रा
Wednesday, March 25, 2009
आईपीएल चला विदेश...
तो आखिर इस बात का फैसला हो गया कि इस बार आईपीएल का आयोजन दक्षिण अफ्रीका में होगा। हालांकि, इस दौड़ में इंग्लैंड भी शामिल था, लेकिन बाजी दक्षिण अफ्रीका के हाथ आई।
खैर, चुनावों से तारीखों की टकराहट के कारण इसके इस बार भारत में होने पर तो पहले से ही संदेह जताया जा रहा था। खिलाडि़यों को खुश करने के लिए बोर्ड ने इसकी आयोजन की तारीखों को भी 8 दिन आगे बढ़ा दिया है। दरअसल, खिलाड़ी दबी जुबान में बोर्ड के इस कड़े कार्यक्रम का विरोध करने लगे थे। उन्हें अपने परिवार से मिलने का वक्त नहीं मिल रहा था।
वेसे, दक्षिण अफ्रीका का मौसम इस समय क्रिकेट के लिए माकूल माना जा रहा है, वहीं इंग्लैंड में इन दिनों बरसात के दिन चल रहे हैं, इसलिए इंग्लैंड इस दौड़ में पिछड गया।
लेकिन, इन सब बातों के बीच आईपीएल चैयरमेन ललित मोदी और क्रिकेट दक्षिण अफ्रीका के अध्यक्ष गेराल्ड मोयला की दोस्ती भी रंग लाई दिखती है। अब नए ताजा कार्यक्रम के अनुसार दक्षिण अफ्रीका के छह मैदानों में इस टूर्नामेंट के मैच खेले जाएंगे। इसके साथ ही इस बात का भी ख्याल रखा जाएगा कि मैचों का प्रसारण उस समय किया जाएगा ताकि भारतीय दर्शक टीवी पर मैच शाम चार बजे और आठ बजे ही देख पाएं। इससे यह बात तो साफ हो गई कि क्रिकेट अब स्टेडियम से ज्यादा टीवी का खेल हो गया है। कैमरा लोगों की आंख और सोच बन गया है। रोज आती नयी तकनीक दर्शकों को खेल के नए आयामों से रूबरू करवा रही है।
आईपीएल के बाहर जाने को भले ही देश की साख पर एक सवाल की नजर से देखा जा रहा हो, लेकिन एक बात और है कि इसके बाहर जाने से एक नए बाजार के दरवाजे भी तो खुल रहे हैं। नए लोग और नए चाहने वाले इस टूर्नामेंट से जुड़ रहे हैं। सचिन तेंदुलकर जैसे खिलाड़ी आईपीएल के बाहर जाने पर अफसोस जता चुके हैं। इसके साथ ही, फ्रेंचाइजी तो यही चाहते थे कि आईपीएल का आयोजन भारत में ही हो, लेकिन जब सवाल यह उठा कि या तो इसका आयोजन कहीं और हो या फिर ना हो, तो फिर दूसरे ही रास्ते को ही बेहतर माना गया। खैर, जो कुछ हो आईपीएल तो विदेश चल पड़ा है। तो इस बार आईपीएल बन गया है एसएआईपीएल।
खैर, चुनावों से तारीखों की टकराहट के कारण इसके इस बार भारत में होने पर तो पहले से ही संदेह जताया जा रहा था। खिलाडि़यों को खुश करने के लिए बोर्ड ने इसकी आयोजन की तारीखों को भी 8 दिन आगे बढ़ा दिया है। दरअसल, खिलाड़ी दबी जुबान में बोर्ड के इस कड़े कार्यक्रम का विरोध करने लगे थे। उन्हें अपने परिवार से मिलने का वक्त नहीं मिल रहा था।
वेसे, दक्षिण अफ्रीका का मौसम इस समय क्रिकेट के लिए माकूल माना जा रहा है, वहीं इंग्लैंड में इन दिनों बरसात के दिन चल रहे हैं, इसलिए इंग्लैंड इस दौड़ में पिछड गया।
लेकिन, इन सब बातों के बीच आईपीएल चैयरमेन ललित मोदी और क्रिकेट दक्षिण अफ्रीका के अध्यक्ष गेराल्ड मोयला की दोस्ती भी रंग लाई दिखती है। अब नए ताजा कार्यक्रम के अनुसार दक्षिण अफ्रीका के छह मैदानों में इस टूर्नामेंट के मैच खेले जाएंगे। इसके साथ ही इस बात का भी ख्याल रखा जाएगा कि मैचों का प्रसारण उस समय किया जाएगा ताकि भारतीय दर्शक टीवी पर मैच शाम चार बजे और आठ बजे ही देख पाएं। इससे यह बात तो साफ हो गई कि क्रिकेट अब स्टेडियम से ज्यादा टीवी का खेल हो गया है। कैमरा लोगों की आंख और सोच बन गया है। रोज आती नयी तकनीक दर्शकों को खेल के नए आयामों से रूबरू करवा रही है।
आईपीएल के बाहर जाने को भले ही देश की साख पर एक सवाल की नजर से देखा जा रहा हो, लेकिन एक बात और है कि इसके बाहर जाने से एक नए बाजार के दरवाजे भी तो खुल रहे हैं। नए लोग और नए चाहने वाले इस टूर्नामेंट से जुड़ रहे हैं। सचिन तेंदुलकर जैसे खिलाड़ी आईपीएल के बाहर जाने पर अफसोस जता चुके हैं। इसके साथ ही, फ्रेंचाइजी तो यही चाहते थे कि आईपीएल का आयोजन भारत में ही हो, लेकिन जब सवाल यह उठा कि या तो इसका आयोजन कहीं और हो या फिर ना हो, तो फिर दूसरे ही रास्ते को ही बेहतर माना गया। खैर, जो कुछ हो आईपीएल तो विदेश चल पड़ा है। तो इस बार आईपीएल बन गया है एसएआईपीएल।
Thursday, March 12, 2009
वाह सहवाग वाह!
पिछले काफी समय से व्यस्ताओं और आलसीपन के चलते ब्लॉग पर समय नहीं दे पाया। उसके लिए माफी चाहता हूं। इस बार पूरी कोशिश है कि ब्लॉग को नियमित अपडेट करता रहूं।
वीरेंद्र सहवाग ने न्यूजीलैंड के हैमिल्टन मैदान पर बल्लेबाजी का वो नजारा पेश किया कि देखने वालों के मुंह से सिर्फ एक ही शब्द निकला- वाह! बुधवार को जब देश होली के रंगों में सराबोर था, सहवाग हैमिल्टन में आतिशाबाजी कर रहे थे। सहवाग के सामने न्यूजीलैंड के गेंदबाज असहाय नजर आए।
सिर्फ 60 गेंदों का फासला तय करना पड़ा सहवाग को वनडे क्रिकेट में अपने 11 वें शतक तक पहुंचने के लिए। इसके साथ ही सहवाग वनडे में भारत की ओर से सबसे तेज शतक लगाने वाले बल्लेबाज बन गए। 21 साल पुराना मोहम्मद अजहरुद्दीन का रिकॉर्ड टूट गया। यह संयोग की ही बात है कि उस समय भी विपक्षी टीम न्यूजीलैंड ही थी और बुधवार को भी न्यूजीलैंड की टीम ही सामने थी। उनकी इस पारी में आक्रमकता तो थी, लेकिन हड़बड़ाहट नहीं दिखी। बल्ले से निकलता हर शॉट क्रिकेट की खूबसूरती दिखाता नजर आया। हां, एक-दो शॉट जरूर मिसहिट हुए, लेकिन यही तो सहवाग का अंदाज है- पूरी तरह बेखौफ।
पहले विकेट के लिए सहवाग ने अपने साथी गौतम गंभीर के साथ मिलकर 201 रन जोड़े। हालांकि, गंभीर ने भी करीब 100 के स्ट्राइक रेट से 63 रन बनाए, लेकिन सहवाग के 74 गेंदों में 125 रनों के सामने उनकी यह पारी अनदेखी रह गई।
न्यूजीलैंड के गेंदबाजों की असहयता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कीवी टीम के कप्तान डेनियल विटोरी ने चौथे वनडे में हार के बाद कहा कि जब सहवाग इस अंदाज में बल्लेबाजी कर रहे हों, तो गेंदबाज कुछ नहीं कर सकते।
दुनिया भर के गेंदबाजों के लिए खौफ बन चुके सहवाग को शॉट पिच गेंदों के सामने कुछ कमजोर समझा जाता रहा। कहा जाने लगा कि अगर उन्हें रोकना है तो, यही सबसे कारगर उपाय है। लेकिन, अब लगता है कि उन्होनें अपनी इस कमी से भी पार पा लिया है। मैच के बाद संजय मांजरेकर भी कहते दिखे कि सहवाग अब शॉट गेंदों के सामने पहले से ज्यादा सहज नजर आते हैं। पहले इंग्लैंड के खिलाफ घरेलू सीरीज और अब न्यूजीलैंड में भी सहवाग पुल शॉट खेल रहे थे, जैसे वे गेंदबाजों को संदेश देना चाह रहे हों कि बच के रहना, अब मेरे तरकश में यह तीर भी है। निश्चित रूप से यह गेंदबाजों के लिए अच्छी खबर नहीं है।
न्यूजीलैंड दौरे पर जाने से पहले सहवाग ने कहा था कि वहां की पिचें उनके बल्लेबाजी स्टाइल के अनुरुप नहीं है, शायद उनके जेहन में 2002-03 की यादें होंगी, जब भारतीय बल्लेबाजी ताश के पत्तों की तरह ढ़ह गई थी। लेकिन, उस दौरान भी उन्होंने सात मैचों में दो शतक लगाए थे।
इस बार की पिचें तो रनों से भरपूर नजर आ रही हैं, तभी तो सहवाग कहते हैं कि न्यूजीलैंड के छोटे मैदानों और सपाट पिचों के चलते यहां बल्लेबाज वनडे में दोहरा शतक बना सकता है। कभी बल्लेबाजों के लिए कब्रगाह मानी जाने वाली न्यूजीलैंड के विकेटों पर इस बार गेंदबाजों की उम्मीदों को झटका लगा है। लेकिन जो भी हो क्रिकेट बल्लेबाजों का खेल है और इस बात की अब तस्दीक होती जा रही है। और जिस तरह की विकेटें बनती जा रही हैं वो दिन अब दूर नजर नहीं आता जब वनडे क्रिकेट में भी बल्लेबाज 200 रन का जादुई आंकड़ा छू लेंगे।
भारत मल्होत्रा
सिर्फ 60 गेंदों का फासला तय करना पड़ा सहवाग को वनडे क्रिकेट में अपने 11 वें शतक तक पहुंचने के लिए। इसके साथ ही सहवाग वनडे में भारत की ओर से सबसे तेज शतक लगाने वाले बल्लेबाज बन गए। 21 साल पुराना मोहम्मद अजहरुद्दीन का रिकॉर्ड टूट गया। यह संयोग की ही बात है कि उस समय भी विपक्षी टीम न्यूजीलैंड ही थी और बुधवार को भी न्यूजीलैंड की टीम ही सामने थी। उनकी इस पारी में आक्रमकता तो थी, लेकिन हड़बड़ाहट नहीं दिखी। बल्ले से निकलता हर शॉट क्रिकेट की खूबसूरती दिखाता नजर आया। हां, एक-दो शॉट जरूर मिसहिट हुए, लेकिन यही तो सहवाग का अंदाज है- पूरी तरह बेखौफ।
पहले विकेट के लिए सहवाग ने अपने साथी गौतम गंभीर के साथ मिलकर 201 रन जोड़े। हालांकि, गंभीर ने भी करीब 100 के स्ट्राइक रेट से 63 रन बनाए, लेकिन सहवाग के 74 गेंदों में 125 रनों के सामने उनकी यह पारी अनदेखी रह गई।
न्यूजीलैंड के गेंदबाजों की असहयता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कीवी टीम के कप्तान डेनियल विटोरी ने चौथे वनडे में हार के बाद कहा कि जब सहवाग इस अंदाज में बल्लेबाजी कर रहे हों, तो गेंदबाज कुछ नहीं कर सकते।
दुनिया भर के गेंदबाजों के लिए खौफ बन चुके सहवाग को शॉट पिच गेंदों के सामने कुछ कमजोर समझा जाता रहा। कहा जाने लगा कि अगर उन्हें रोकना है तो, यही सबसे कारगर उपाय है। लेकिन, अब लगता है कि उन्होनें अपनी इस कमी से भी पार पा लिया है। मैच के बाद संजय मांजरेकर भी कहते दिखे कि सहवाग अब शॉट गेंदों के सामने पहले से ज्यादा सहज नजर आते हैं। पहले इंग्लैंड के खिलाफ घरेलू सीरीज और अब न्यूजीलैंड में भी सहवाग पुल शॉट खेल रहे थे, जैसे वे गेंदबाजों को संदेश देना चाह रहे हों कि बच के रहना, अब मेरे तरकश में यह तीर भी है। निश्चित रूप से यह गेंदबाजों के लिए अच्छी खबर नहीं है।
न्यूजीलैंड दौरे पर जाने से पहले सहवाग ने कहा था कि वहां की पिचें उनके बल्लेबाजी स्टाइल के अनुरुप नहीं है, शायद उनके जेहन में 2002-03 की यादें होंगी, जब भारतीय बल्लेबाजी ताश के पत्तों की तरह ढ़ह गई थी। लेकिन, उस दौरान भी उन्होंने सात मैचों में दो शतक लगाए थे।
इस बार की पिचें तो रनों से भरपूर नजर आ रही हैं, तभी तो सहवाग कहते हैं कि न्यूजीलैंड के छोटे मैदानों और सपाट पिचों के चलते यहां बल्लेबाज वनडे में दोहरा शतक बना सकता है। कभी बल्लेबाजों के लिए कब्रगाह मानी जाने वाली न्यूजीलैंड के विकेटों पर इस बार गेंदबाजों की उम्मीदों को झटका लगा है। लेकिन जो भी हो क्रिकेट बल्लेबाजों का खेल है और इस बात की अब तस्दीक होती जा रही है। और जिस तरह की विकेटें बनती जा रही हैं वो दिन अब दूर नजर नहीं आता जब वनडे क्रिकेट में भी बल्लेबाज 200 रन का जादुई आंकड़ा छू लेंगे।
भारत मल्होत्रा
Subscribe to:
Posts (Atom)